२ अक्टूबर गांधी जयंती

सबको प्यारे
बटुआ में जो बैठे-
महात्मा गांधी
©आरती परीख २.१०.२०२१

बेनाम रिश्ता

कितना सुहाना था; हमारा रिश्ता,
ना आपने बांधा; ना हमने छोड़ा।

सफर तय था; विपरीत दिशा में,
संयोग अनुसार जीवन को मोड़ा।

हंसी रिश्ते-नाते कुचलता मचलता,
बुलंदियों पर पहुंचा जीवन घोड़ा।

“जी तो लो थोड़ी देर”_दिलने पुकारा,
सुकून कि तलाश में; फिर से दौड़ा।

संस्कार और समाज की जंजीरों में बंधे,
“आरती”कि ज्योति जैसे मिलते थोड़ा थोड़ा।

– आरती परीख २.१०.२०२१

સ્નેહ સંબંધ

હેતથી ગૂંથી
સંસ્મરણોથી ભરી
મન સંદૂક

  • આરતી પરીખ ૧૮.૯.૨૦૨૧

गृहिणी

छोटी छोटी बात पर
चिकचिक करने वाली मैं,
अपनों की
बडी बडी सी गुस्ताखी पर
आंखों में नमी भरे
चूप्पी सी पकड़ लेती हूँ,
घर की बात
चार दिवारों में ही
समेट लेती हूँ,
क्या करुं
गृहिणी जो हूँ!
_आरती परीख २.७.२०२१

पावस ऋतु

बादल छाये
पसीना निचोड़ती
मायूस धूप
_आरती परीख २.७.२०२१

ख़्वाब

सन्नाटा देख
अनबूने से ख़्वाब
शोर मचाये
-आरती परीख २.७.२०२१

हिन्दी में हाइकु कविता – डॉ. जगदीश व्योम का आलेख

http://www.abhivyakti-hindi.org/rachanaprasang/2005/hindi_haiku.htm

बिरहन


सूर्य किरणें
बादल चीर कर
धरा को ढूंढे
-आरती परीख २७.६.२०२१

વિરોધાભાસી જીવન

ઝળહળતી
એકલતા ઓઢીને
ભવ્ય હવેલી

ફાનસ તળે
મધમીઠો વસ્તાર
ઝૂંપડી માણે
-આરતી પરીખ

*વસ્તાર = છોકરાંછૈયાંની સારી એવી વૃદ્ધિ, બહોળું કુટુંબ હોવું એ