रिश्ते-नाते

रिश्ते बिछड़े
गले लग गई है
उनकी यादें
©आरती परीख १६.६.२०१८

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ગરમી

ભરબપોરે
આંગણું ને અગાસી
તડકે ન્હાય
©આરતી પરીખ ૧૬.૬.૨૦૧૮

संस्कार

लूट न सके
कोई भी कभी भी
निज संस्कार
©आरती परीख १५.६.२०१८

बर्षा का इंतजार

खिंच ले गई
ये कातिल हवाएँ
बादल टोली
©आरती परीख १४.६.२०१८

खेल

खेल का मोह
छूटा ही नहीं..
बच्चे थे तो,
खिलौनों से खेलते थे।
बडे़ क्या हुए,
रिश्तों से खेलने लगे!
©आरती परीख १४.६.२०१८

इंतजार

सुबह के
इंतजार में
रातभर
जलते रहे
गोखले में दीप
कमरे में हम!
©आरती परीख १४.६.२०१८

अतूट संबंध

तेज हवाएं
उडा ले गई
अनगिनत पत्तें
फिर भी
हमने
पेडपौधों को
हवाओं संग
गुनगुनाते
देखा है…
सुना है…!
©आरती परीख १३.६.२०१८