મરકટ મન

​લપસણું થ્યું

સુંવાળા વિચારોમાં

મન તળિયું

© આરતી પરીખ ૨૩.૮.૨૦૧૭

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अंगार

​जब से….

अपने हर एक

अल्फ़ाज़, कदम, नज़र, व्यवहार

मैं

एक ऐसा 

तीखार..अंगार रखा है

कि,

सामने वाला

हरदम हरकदम हर व्यवहार

से पहले

सोचने पर मजबूर हो

कि,

“जल तो नहीं जायेंगे?”


तब से…

में

और

मेरे अम्मी अब्बू सुकून से जीतें है!

© आरती परीख २२.८.२०१७