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ख्वाहिशें

आंखों में बसी-
सप्तरंगी ख्वाहिशें
दिल से जवां
©आरती परीख

સંસ્મરણો

સાચવી જાણે-
દિલ પરબીડિયું
સ્મરણ પત્રો
© આરતી પરીખ

बेफिक्री

आने वाले
वक्तकी
फिक्र करना छोड़ दिया है।
बस,
अभी
जो पल मीली
जैसी भी मीली
उसे
जी भर के
जीने कि
कोशिश में व्यस्त हूं।
_आरती परीख

बिमारियां

बढती रही
दवाईयों से दोस्ती
उम्र के साथ
_आरती परीख

इंतज़ार

तेरे
इंतज़ार में
वक्त कटता नहीं
फिर भी
कतरा कतरा
जिंदगी काट रही हूं।
-आरती परीख १५.११.२०२१

ख़्वाब

सन्नाटा देख
अनबूने से ख़्वाब
शोर मचाये
-आरती परीख २.७.२०२१

बिरहन


सूर्य किरणें
बादल चीर कर
धरा को ढूंढे
-आरती परीख २७.६.२०२१

मौसम की नजाकत

मेघ कि बूंदें
गुडिय़ा के बालों में
मोती पिरोये
– आरती परीख २५.६.२०२१

इसी का नाम जिंदगी

निगल गई
बहुत सी ख्वाहिशें
जिम्मेदारीयाँ
_आरती परीख ९.३.२०२१