Archives

गुलदस्ता

गुलदस्ते मैं सजे हुए फूलों जैसी ही है अपने जीवन की दास्तान…

जब तक सुंदरता है, महेंक है..

तब तक सब लोग ईर्दगिर्द घुमते मिलेंगे।

_ आरती परीख

Advertisements

આકાંક્ષા

ઈચ્છા વમળો
ઘૂમરડી ફરતું
ચંચળ મન
_આરતી પરીખ ૧.૨.૨૦૧૯

दोपहर

सूरजदेव
खजूरी पर चढा
पसीना छूटे
~~
दोपहर में
सिर पे खडा़ रवि
तप्त धरती
©आरती परीख ४.१०.२०१८

स्वछता अभियान

मुग्ध लहरें
रेत चट्टानों बीच
पग पखारे
©आरती परीख ४.१०.२०१८

સૂર્યોદય

તડકો રોપી
સૂરજ રથ હાંકે
ધરા ચળકે
©આરતી પરીખ ૪.૧૦.૨૦૧૮

सुनहरी यादें

ढलती उम्र
गौरव भरी यादें
जोश जगाये
©आरती परीख ३.१०.२०१८