Archives

बेमौसम

बिन मौसम
हल्की सी बरसात
जाम छलके

  • आरती परीख १.१२.२०२१

बेफिक्री

आने वाले
वक्तकी
फिक्र करना छोड़ दिया है।
बस,
अभी
जो पल मीली
जैसी भी मीली
उसे
जी भर के
जीने कि
कोशिश में व्यस्त हूं।
_आरती परीख

Work from Home

रातभर
खर्राटें भरता
जिस्म बिस्तर पर
और
सात समंदर कि
सैर करता
बाँवरा मन
ख्बाबों में!

  • आरती परीख १६.३.२०२१

मकान

संभाल कर रखी है
सातबारा उतारा में
घर की ख्वाहिश!

  • आरती परीख १४.२.२०२१

સંઘર્ષ

એકાંતમાં દર્પણમાં જાતને નિહાળી; ત્યારે ખબર પડી,
જમાના સામે જંગ જીતવા; કેટલાં મહોરાં પ્હેરી લડી!
©આરતી પરીખ ૨૩.૧૨.૨૦૨૦

નિસર્ગ

ઈશ અમીરી-
સૂરજની સગડી
દીવો ચંદ્રનો
~~

ईश अमीरी-
दिनकर का चुल्हा
दिया शशि का

_आरती परीख १०.११.२०२०

આધુનિકતા

દેખાડો કરી-
બે મણ ભાર સાથે
બે જણ મળે
_આરતી પરીખ ૨.૧૧.૨૦૨૦

मौका

सूरज क्षितिज पर जैसे ही अस्त हुआ,
संध्या के रंगों से आसमां मस्त हुआ।
_आरती परीख

प्रतिक्षा

सूर्योदय के साथ
आपके आगमन की
मृगतृष्णा
बहती दिखाई दे
यह
तप्त रेगिस्तान में!
© आरती पारिख २.९.२०२०

घडी

महंगी घडी
गिनेचुने लोगों के नसीब।
मुश्किल घडी
हर कोई के जीवन में पाई गई!
_आरती परीख २८.८.२०२०

*घडी = ઘડિયાળ wrist watch, સમય timepiece