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संस्कार

लूट न सके
कोई भी कभी भी
निज संस्कार
©आरती परीख १५.६.२०१८

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खेल

खेल का मोह
छूटा ही नहीं..
बच्चे थे तो,
खिलौनों से खेलते थे।
बडे़ क्या हुए,
रिश्तों से खेलने लगे!
©आरती परीख १४.६.२०१८

इंतजार

सुबह के
इंतजार में
रातभर
जलते रहे
गोखले में दीप
कमरे में हम!
©आरती परीख १४.६.२०१८

अतूट संबंध

तेज हवाएं
उडा ले गई
अनगिनत पत्तें
फिर भी
हमने
पेडपौधों को
हवाओं संग
गुनगुनाते
देखा है…
सुना है…!
©आरती परीख १३.६.२०१८

जाग उठा

यारा; जीवन में दिनबदिन संघर्ष बढने लगा है,
समझलो; बरसों से सोया ईन्सान जाग उठा है!
©आरती परीख १२.६.२०१८

पहचान

समय के साथ पडछाई को तो कद बदलना पडता है,
ईसी वजह से हम अपनी छोटीसी पहचान से संतुष्ट हैं।
©आरती परीख ११.६.२०१८

Don’t run after Famous personality..

Be Confident and make your personality unique.

અસ્તિત્વ

ઘરમાં અરસપરસથી હુંફાળો એક ખૂણો હોય,
જ્યાં હોવાપણાનો અહેસાસ સદાય કૂણો હોય!
©આરતી પરીખ ૨૨.૫.૨૦૧૮