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कुशल स्त्री/गृहिणी

पहले बाबा (पप्पा)
फिर पति
और
दुनिया की नज़र में
नसीबदार है
तो,
अंत में बेटा..
.
.
.
इन सब की
अनुमति के अनुसार
अपनी ख्वाहिशों को
तोड़-मरोड़ कर….

जीवन सागर में
स्नेह की सरिता बन पाये….

आज भी,

समाज की नज़र से देखो तो,

वो ही है…..
.
.
कुशल स्त्री (गृहिणी)!
©आरती परीख ११.२.२०१८

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ઘર

મહિનાઓ પછી

મા ની જીભે

ફરી એ જ….


સમયસર ઉઠવાનો કકળાટ

સાફસફાઈની કચકચ

સાત્વિક ખોરાક લેવાની માથાકૂટ

શિખામણોનો બણબણાટ

……. ચાલુ થઈ ગયો છે.


વેકેશન હોય,

હૉસ્ટેલથી 

દિકરી 

ઘરે આવી છે.


દિકરીને 

ઘર ઘર જેવું જ લાગવું જોઈએ!

ઘરમાં કશું જ બદલાયું નથી!


કાળજું કઠણ રાખી,
….મા સતત પ્રયત્નશીલ…..

©આરતી પરીખ ૩૦.૧૨.૨૦૧૭

सफलता

कौन अपना, कौन पराया?”

_समझने में सफल हुए

जब, 

जीवन के एक मौड़ पर

असफल हुए!

© आरती परीख २०.११.२०१७

दफन

संवेदनाएं

जिस्म में ही 

दफन किए

जी भर के जी रहे है

आधुनिकता…

© आरती परीख ८.११.२०१७

मधुर मिलाप

आज

९ साल होने जा रहे हैं…
अब

आदत बन गई

हररोज

चेटिंग की..
दिन गुजरते गए…
न जाने 

कितनी आदतें

कितने विचार

मिलते जुलते नीकलते गए…
अलग देश

अलग धर्म

अलग भाषा
फिर भी,
हम

ऐसे ही मील गए थे

फेसबुक पर
अब

हररोज मिलने लगे

वोत्सेप पर….!

© आरती परीख १८.८.२०१७

પીંછું

​જે 

પીંછાથી 

ક્યારેક

એકબીજાની

હથેળીઓ

ચૂમી હતી,


પીંછું;


આ 

બૂઢાપામાં’ય

મીઠાં સ્પંદનો

જગાવી જાય છે…


ડાયરીમાંથી ડોકાય ને…!!

~ આરતી પરીખ ૧૨.૫.૨૦૧૭

गिला शिकवा

बिछड़े कैसे?!

मिलन की तलप

बढाते गए

गिला शिकवा

लड़ाई झगड़ा..!!

_ आरती परीख २६.४.२०१७