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होली

बच्चों की टोली
टेसूआ पिचकारी
घुमते गली
*****
फागुनी हवा
रंगोत्सव का नशा
मौसम जवां
*****
टेसूआ रंग
भीगी छोरी की चोली
चौराहा जवां
*****
टेसूआ संग
मृदंग और भंग
होली उमंग
*****
नंद के लाल
छिटकते गुलाल
राधा के गाल
©आरती परीख

फागुनी रंगोत्सव की शुभकामनाएं

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गुलदस्ता

गुलदस्ते मैं सजे हुए फूलों जैसी ही है अपने जीवन की दास्तान…

जब तक सुंदरता है, महेंक है..

तब तक सब लोग ईर्दगिर्द घुमते मिलेंगे।

_ आरती परीख

बात

साफ मन से लिखती हूं,
लगे भले ही कडवी
पर
सच्ची बात लिखती हूं,

सरल शब्दों में,
हर दिल को छू जाए..
ऐसी बात लिखती हूं।
~ आरती परीख
११.३.२०१९

मधूर

दिल की कहे तो; सब रिश्ते आधे अधूरे ही है,

कहीं प्यार जिँदा है; इसलिए आधे भी मधूरे है।

©आरती परीख १०.२.२०१९

अस्त

अंधार छाया
रफूचक्कर हुआ
अपना साया
©आरती परीख ३०.१.२०१९

अभिलाषा

टिमटिमाती
अखियोँ के झरोखें
अभिलाषाएँ
©आरती परीख ३०.१.२०१९

राज

न तीर से,
न तलवार से,
न तेवर से,
हमें तो..
सबके ❤ में
राज करना है;
संस्कार से,
सभ्यता से,
सरलता से।
©आरती परीख १६.१.२०१९