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समुद्र तट

तैरती दिखें
अरबी चकाचौंध
रात की बेला
_आरती परीख २.८.२०२०

संध्या

बाँहें पसार
छत पर जा बैठी
शाम की धूप
© आरती परीख ३१.७.२०२०

सूर्यास्त

समेट बैठा
सूरज की किरणें
नीला अंबर
_आरती परीख ३०.७.२०२०

निरस

गोता लगायें
साहित्य सरिता में
गीने चूने ही
_आरती परीख २८.७.२०२०

विरह

समानान्तर
भीगने को तत्पर
नदी किनारे
_आरती परीख २८.७.२०२०

शांति

शहरी रात्रि
कोलाहल निगलें
सन्नाटा खडा
©आरती परीख

वेदना

सीने का बोज
बेजुबां संवेदना
आँखों से बहे
_आरती परीख २८.७.२०२०

विदेशागमन

तिनका जोड
बुना घोंसला।
उडना क्या सीखें..
कलरव करते,
गगन विहार में मस्त
अपना
उपवन छोड!
_आरती परीख २७.७.२०२०

मौन

समझ सकें
करीबी यार दोस्त
नैनों की भाषा
_आरती परीख २६.७.२०२०

संस्मरण

दस्तक देती
तन्हाई के पलों में
सुहानी यादें
_आरती परीख २६.७.२०२०