मन

“मन” हाइकु


तन्हा सा मन
उमड़ पड़ी यादें-
उदासी लिए


जलते रहे
मिलन की आश में-
मन दिपक


बोझिल रिश्ते
सैलाब उमड़ता
मन सागर


फडफडाती
चुलबुली ख्वाहिशें
मन पिंजर


मन हिरन
भागदौड फिरता
स्वप्निल वन


बयां करती
मन की सिलवटें
आँखों की नमी


स्मरण-पंछी
घोंसला बना बैठे
मन मुँडेर


भीगी भीगी सी
स्मरण पगडंडी
मन-जंगल


स्मरण सुर
छमकने लगते
मन नुपूर

१०
चहक रही
रंगबिरंगी यादें
मन मुँडेर

११
सरक रही
नीले ख्वाबों की कश्ती
मन सागर

१२
उछल रहा
यादों का समंदर
मन भीतर

१३
पिंजर तोड़
उडने को बैचैन
मन का पंछी

१४
शब्दों के घाव
दर्द जीवनभर
मन बावरा

१५
शब्द खामोश
छलके संवेदना
भ्रमीत मन

१६
दरिया पार
उड़ने को बेचैन
मन का पंछी

१७
नसों में दौड़े-
स्मरणीय कारवाँ
मन बावरा

१८
साजन झुले-
अखियों के झरोखें
मनवा रोये

१९
तन्हा सा मन
उमड़ पड़ी यादें-
उदासी लिए

२०
मन में कैद
गगन विहार के-
आज़ाद ख्याल

२१
भीगा बदन
बारिश की झडियाँ
सूखा मनवा

२२
बदरा छाए
कुदमकुद करें
मेंढक मन

२३
मनभावन
आंगन में नाचती
शिशिर धूप

२४
बरखा बूँदें
तालबद्ध बरसे
मनवा नाचें

२५
साँझ की बेला
मौसम अलबेला
मन अकेला

२६
खनक रहे
मन गुल्लक में ही
यादों के सिक्के

२७
शरीर लेटा
सपनें बुन चला
चंचल मन

२८
खनका रहा
अनबुने सपनें
मन गुल्लक

२९
छाया तिमिर
जलाया मनदीप
हुआ उजाला

३०
प्रीत में रत
बजे मन बांसुरी
बॉस सा जीव

३१
उखड़े मन
समझौता क्या जाने?!
उजड़े घर

३२
उडना चाहे
दूर गगन छाँव
पंछी सा मन

३३
मन मंदिर
आरती दीप जले
आलोक भरे

३४
खामोश रातें
टिमटिमाते तारें
मन लुभातें

३५
सूरज ढले
मन की आग बुज़े
चाँद निखरे

३६
अँधेरा भागा
इरादों का सूरज
मन में जागा

✍🏻 आरती परीख १४.१.२०२३

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