क्षितिज


संध्या फलक
क्षितिज के मस्तिष्क
सूर्य तिलक
—-

सूरज रथ
क्षितिज पर थमा
गोधूलि बेला
—-

निगल गई
क्षितिज की लालीमा
बैरन निशा
—-

क्षितिज बैठा
दिनचर्या सुनता
सूरज दादा
—-

क्षितिज लाल
तुफानी समंदर
सूरज डूबा
—-

भागता फिरे
बैठक क्षितिज पे
थका जो रवि
—-

आग का गोला
क्षितिज ने निगला
छाया अँधेरा
_ आरती परीख ६.१२.२०२२

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