Archive | October 2022

शाम/संध्या

“शाम/संध्या” विषय पर कुछ हाइकु जो मैंने लिखे है…..

बाँहें पसार
छत पर जा बैठी
शाम की धूप
—-
नीला आसमां
स्वप्निल रंग भरे
सुहानी संध्या
—-
रवि की कश्ती
समंदर में डूबी
आकाश लाल
—-
मुँडेर बैठी
अलसाई सी धूप
संध्या ठहेकी
—-
दिवस लुप्त
समुद्र में घुलती
केसरी धूप
—-
संध्या स्वरुप
नदियाँ में नहाती
फकीरी धूप
—-
लहुलुहान
आसमां की सैर में
संध्या के पैर
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गोता लगाये
सागर में सूरज
आसमां लाल
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संध्या फलक
क्षितिज के मस्तिष्क
सूर्य तिलक
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सूरज रथ
क्षितिज पर थमा
गोधूलि बेला
—-
सूरज ढला
आसमां में चमके
संध्या लालित्य
—-
रवि का ठेला
समंदर में गिरा
सांझ की बेला
—-
रवि का ठेला
समंदर में गीरा
ठहाके संध्या
—-
सूर्य किरणें
दुपट्टे में लपेट
ढलती सांझ
—-
बादल भोले
सुनहरी झाँकती
उषा/संध्या किरणें
—-
स्वर्णिम संध्या
अलौकिक नजारा
पर्वत कंघा
—-
दिवस लुप्त
समुद्र में घुलती
केसरी धूप
—-
शिशिर ऋतु
धूँध दुपट्टा ओढ़े-
शर्मिली संध्या
—-
कोहरा लिए-
संध्या ठुमक रही
रुठे चांदनी
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बिखर रही-
सूरज की किरणें
सुहानी शाम
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संध्या निखरी
काला रंग छिटके-
निगोडी निशा
—-
साँझ की बेला
मौसम अलबेला
मन अकेला
—-
संध्या जो ढली
चांद सितारों संग
निशा विचरे
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गोधूलि बेला
दृश्य है अलबेला
जीवन ठेला
—-
गोधूलि बेला
अंबर पे सजेगा
निशा का ठेला
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गम की शाम
समंदर में डूबी
अंधेरा छाया
—-
नीला अंबर
काला कम्बल ओढ़ें
शाम जो ढली
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द्वार पे खड़ी
चांद तारोंकी सेना
क्षितिज लाल
—-
लाल क्षितिज
तुफानी समंदर
सूरज डूबा
—-
शाम ढलते
समुद्र में नहाये
पथिक सूर्य
—-
सूरजदेव
भगवा लहराये
सुबह शाम
✍🏻 आरती परीख