Archive | March 2, 2020

असंतोष

कभी चाही थी
रफ्तार जिंदगी में
मिल गई तो
सूकुन की खोज में
दिन काटते फिरें
_आरती परीख २.३.२०२०

तराश

चलती रही
जीवन की तराश
स्मशान तक
_आरती परीख २.३.२०२०
तराश=काट-छाँट