Archive | February 26, 2020

संस्कार

वो संस्कार ही है
जिसकी वजह से
कभी
सिर उठा न सके।
बाकी,
हम सभी के अंदर
अहंकार
ठुस ठुस कर भरा पड़ा है।
-आरती परीख २६.२.२०२०

अंकुश

अक्सर
हमनें
फिसलते रोक ली
अपनी जुबां..
महफूज़ है,
रिश्ते नाते!
– आरती परीख २६.२.२०२०

बसंत

फागुन आया
संदूक में जा छिपे
ऊनी कपड़े
©आरती परीख २६.२.२०२०