Archive | February 2020

संस्कार

वो संस्कार ही है
जिसकी वजह से
कभी
सिर उठा न सके।
बाकी,
हम सभी के अंदर
अहंकार
ठुस ठुस कर भरा पड़ा है।
-आरती परीख २६.२.२०२०

अंकुश

अक्सर
हमनें
फिसलते रोक ली
अपनी जुबां..
महफूज़ है,
रिश्ते नाते!
– आरती परीख २६.२.२०२०

बसंत

फागुन आया
संदूक में जा छिपे
ऊनी कपड़े
©आरती परीख २६.२.२०२०

असलियत

ढक न सके
महंगे ये कपडें
सस्ती सी सोच
_आरती परीख २०.२.२०२०
*सस्ती=तुच्छ, निम्न

भय

पूर्णिमा रात
भयावह रम्यता
वन की ओर

  • आरती परीख १८.२.२०२०

वास्तविकता

उभर रहा
युवाओं से शहर
बुढों से गाँव
_आरती परीख १२.२.२०२०

दिल्ही चुनाव

निगल गए
रोटी और बिजली
राष्ट्रवाद

– आरती परीख ११.२.२०२०
😫😫

वोत्सेप

फैलाते रहे
सच्ची जूठी खबरें
वोत्सेप बाबा

  • आरती परीख ४.२.२०२०