Archive | December 2019

खुबसूरत

आत्मा की खुबसूरती बढी,
जब चहेरें पर झुर्रियां पडी।
-आरती परीख २४.१२.२०१९

સજાગ થવું

કઠિન કાર્ય
ઊંઘતાને ઉઠાડવા
જાતથી જાગ્યા
– આરતી પરીખ ૨૪.૧૨.૨૦૧૯

वजूद

लडते रहे
वजूद की लडाई
स्मशान त
_आरती परीख २२.१२.२०१९

बेफिक्र

बेफिक्र
लुफ्त उठा सके
तो,
है
चोकलेटी जिंदगी!
_आरती परीख १९.१२.२०१९

ख्वाहिशें

खुशियाँ छीनें
घरोंदा बना बैठी
बडी ख्वाहिशें
*****
दीन का पेट
अमीर की ख्वाहिश
भूखे ही मिले
*****
क़त्ल करती-
छोटी-छोटी खुशियां
बड़ी ख्वाहिशें
*****
फडफडाती
चुलबुली ख्वाहिशें
मन पिंजर
*****
आंखों में बसी-
सप्तरंगी ख्वाहिशें
नींद चुराये
*****
ढलती उम्र
चुलबुली ख्वाहिशें-
दिल से जवां
*****
दिल में कैद
बगावत करती
ख्वाहिशें लाखों
*****
तरोताजा है
मिलन की ख्वाहिश
नम आँखों मैं
*****
भरते रहे
ख्वाहिशों का पिटारा
बचपन से
©आरती परीख

तमन्ना

हमने एक तमन्ना ऐसी बूनी,
जिंदगी कभी न लगी सूनी!
_आरती परीख १७.१२.२०१९

यादें

बेजबां यादें
गरमाहट भरे
शीत ऋतु में
– आरती परीख १६.१२.२०१९

जिंदगी

दिनबदिन
समय की चक्की मैं-
पीसी जिंदगी
_आरती परीख १५.१२.२०१९

रिश्ते

कभी भी डूबे
शंका आरोपों भरी
रिश्तों की नौका
_आरती परीख १२.१२.२०१९

જતું કરી જીવી જાણ..

વીત્યું ભૂલીને-
શું મેળવ્યું શું આપ્યું
એ જ જીવન