Archive | November 11, 2019

लम्हें

वक्त
कहां किसीका हुआ है।
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पानी की तरह
बहता ही रहा…
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ठहरे लम्हें।
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चट्टानों जैसे..
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अपनें जो थे!
_आरती परीख ११.११.२०१९