मेघ मल्हार

महक उठें
पहली बारिश में
धरती मैया
*****
शांत हो चुका
सूरज का प्रकोप
मेह मल्हार
*****
नभ को चीर
धरती में समाई
दामिनीराणी
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मेह बरसा
नीली चादर तले
धरती सोयी
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बूंद बूंद से
आभ धरा को चूमे
हवा जो रुठे
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बादल टोली
भरने को आतुर
धराकी झोली
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धरा गगन
भीगी भीगी गुफ्तगू
तृण सर्जन
*****
डाल-डाल मैं
जल मोती पिरोये
बरखा रानी
*****
चूल्हे में पानी
फर्श पे बरतन
छत टपके
*****
मस्तानी हवा
नदियाँ हुई जवाँ
बारिश यहाँ
*****
बरखा बूँदें
तालबद्ध बरसे
मनवा नाचें
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बरस गई
बचपनकी यादें
बरखा संग
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भीगा भीगा सा
मन आँगन घर
वर्षाजल से
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महक उठी
बरखा रानी संग
यादें सुहानी
*****
बदरा छाए
कुदमकुद करें
मेंढक मन
*****
सरक गई
पहली बारिश से
सहरा रेत
*****
सूखी डालियाँ
मेघराज पिरोये
वर्षा के मोती
*****
बारिश थमी
भीगी सी धरती को
धूप चूंबन
*****
मेघ तांडव
गांव गांव बिछड़े
हाईवे तूटे
*****
मेघ सवारी
लूकाछूपी खेलती
धूप गौरैया
*****
नभ के द्वार
दामिनी के दस्तक
मेघ मल्हार
©आरती परीख

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