Archive | June 14, 2018

बर्षा का इंतजार

खिंच ले गई
ये कातिल हवाएँ
बादल टोली
©आरती परीख १४.६.२०१८

खेल

खेल का मोह
छूटा ही नहीं..
बच्चे थे तो,
खिलौनों से खेलते थे।
बडे़ क्या हुए,
रिश्तों से खेलने लगे!
©आरती परीख १४.६.२०१८

इंतजार

सुबह के
इंतजार में
रातभर
जलते रहे
गोखले में दीप
कमरे में हम!
©आरती परीख १४.६.२०१८