महिला दिवस

अहं बो रहे
औकात से अधिक
नारी सम्मान

~~~~~

रात या दिन
मनदिप जलाती
घर की लक्ष्मी
~~~~~
मीठें दो बोल
प्यार संस्कार तोल
नारी का मोल
~~~~~
रण या वन
बनाये उपवन
संस्कारी नारी
~~~~~
कुल का मान
क्या अपना-पराया
बेटी या बहू
~~~~~
नारी के पांव
बुजुर्गों की जबान
कभी न थके
© आरती परीख ८.३.२०१८

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