सूर्य/सूरज/रवि

सूर्य/सूरज/रवि विषयवस्तु पर मेरे द्वारा लिखे गए हाइकु

सोना बांटते
प्रभा सूर्य किरणें
धरा चमकें
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सूरज डूबा
चांदनी में चहेके
धरा अंबर
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रवि-बादल
लुकाछिपी में मस्त
धरती त्रस्त
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सूर्य-बादल
लुकाछिपी में मस्त
सर्दी से त्रस्त
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कोहरा भागा
रवि नींद से जागा
लोहड़ी पर्व
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धूप चूनर
सूरज पहनावे
धरती तप्त
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रवि बांवरा-
बदरिया में छुपा
धरा को झांके
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बिखर रही
सूरज की किरणें
सुहानी शाम
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चकनाचूर
सूरज का रुवाब-
बादल छाए
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रंग छिटके
सूरज की किरणें-
नभ सिंदुरी
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सूरज डूबा-
लहुलुहान पानी
अंधेरा छाया
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सूरज डूबा
चांदनी में चहेके
धरा अंबर
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दिनदहाड़े-
मानवता का क़त्ल
सूरज डूबा
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क्षितिज बैठा
दिनचर्या सुनता
सूरज दादा
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शीत लहर
सूरज सुलगाए
धूप अंगीठी
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धूंध से घिरे
शहर गांव गली
रवि निस्तेज
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नम्र हो चले
सूरज के तेवर
शीत लहर
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सूरज थका
धूप गठरी बांधे
निशा मुस्काय
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घुमता फिरे
नीले आसमान में
सुवर्ण गोला
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चुरा ले गई
सूरज की किरणें
धूंध निगोडी
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सूरज ढला
जोश में आ गई
शीत लहर
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लाल क्षितिज
तुफानी समंदर
सूरज डूबा
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सूरज रथ
क्षितिज पर थमा
गोधूलि बेला
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सूरज ढला
आसमां में चमके
संध्या लालित्य
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शांत हो चुका
सूरज का प्रकोप
मेह मल्हार
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छूपा सूरज
आभ में घिर आई
बादल सैना
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सूरज लाल
फूल पत्ते नहाते
ओंस बूंदों से
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सूरज कांध
युग युग से घूमे
आशा गठरी
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कूकड कूक
सूरज सुलगाये
धूप अँगीठी
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भोर की बेला
अंबर में घुमेगा
सूरज छैला
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सूरज तेज़
खिलखिलाते फूल
हंसी उड़ाते
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तृणतृण पे
ओसबुंद बिराजे
सूरज लाल
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सूरज ढला
साथ छोड के चली
परछाई भी
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अँधेरा भागा
इरादों का सूरज
मन में जागा
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सूरज रथ
फ़ोटो खींचें नदियाँ
आकाश लाल
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सूरज ढले
मन की आग बुज़े
चाँद निखरे
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चमक रहा
तृण तृण में ओस
ओस में सूर्य
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ओस में कैद
रवि चमक रहा
तृण तृण में
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रवि का ठेला
समंदर में गिरा
सांझ की बेला
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रवि का ठेला
समंदर में गीरा
ठहाके संध्या
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पौधों के संग
लुकाछिपी खेलती
सूर्य किरणें
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सूर्य किरणें
हर पल बदले
धूप रंगोली
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सूर्य किरणें
दुपट्टे में लपेट
ढलती सांझ
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रवि चरखा
आराम फरमाता
निशा निखरें
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अंधेरी रात
सूर्य के वहम में
छोटा-सा दिया
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सूर्य किरणें
पेड़पौधोंको चूमे
मुस्काये फूल
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निगल गई
तप्त सूर्य किरणें
ये शबनम
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भागता फिरे
बैठक क्षितिज पे
थका जो रवि
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आग का गोला
समंदर निगला
बूझा न गला
©आरती परीख

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