Archive | February 23, 2018

हवा

आक्रोशी हवा
स्थल कद बदले
रेत के टीले
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हवा घुमडी
आँखे चुराये धूप
धुंधला समाँ
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हवा का झोंका
शाखाएं झाड रही
सूखी पत्तियां
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निगोडी हवा
खिंच कर ले गई
काले बादल
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फागुनी हवा-
महक यहाँ तहाँ
मौसम जवाँ
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बर्फिली हवा-
इतराहट भूली
शिशिर धूप
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बर्फिली हवा
गर्माहट दे रहा
बांहों का हार
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क़ातिल हवा
ठिठुरती धरती
शीत आंगन
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बर्फिली हवा
पर्ण विहीन पौधे
चट्टानें चीखें
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सहरा धूप
हवा संग घुमते
रेत के टीले
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मस्तानी हवा
नदियाँ हुई जवाँ
बारिश यहाँ
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पौधों के संग
मधुर नग्में गाती
पावस हवा
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गर्म हवाएं
सरकाती ही रही
रेत के टीले
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चाक पे चढ़ी
दहकती हवाएं
गढ़े गर्म दि’
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उड़ा न सकी
यादों के सूखें पत्तें
तेज हवाएं
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बैसाखी हवा
सहरा में सजाती
रेत रंगोली
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तेज़ हवाएं
ढेर के ढेर हुए
रेत के टीले
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बूंद बूंद से
आभ धरा को चूमे
हवा जो रुठे
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हवा क्या रूठी
घिर आए बादल
प्यार जताने
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कातिल हवा
काँपे गाँव-शहर
धूप ही दवा
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दिशाएँ पीत
हवा गुनगुनाती
वासंती गीत
©आरती परीख

अमीरी

नसीबवर
लम्हें बांटते फिरे
अमीर रिश्ते
©आरती परीख २३.२.२०१८