Archive | August 20, 2017

परवाह

​सबकी परवाह करने में हरदम सांस फूल गई,

बेपरवाह क्या हुए; जीवन में सुकून घुल हुई!

© आरती परीख २१.८.२०१७

मृत्यु

​मिट्टी का देह

पंचमहाभूतिक

रुह जो उड़ी

© आरती परीख २०.८.२०१७