महफ़िल

आप उदासी को आसपास फरकने न देना,
ज़माना हमें ही तो गुनाहगार ठहरायेगा..

~~

किसी के तड़पाने से क्या होता है?!
दिनबदिन प्यार ओर जवाँ होता है !!

~~

जींदगी की रफ़्तार कितनी बढ़ गई है,
कूत्ते को भी गड्डी पे ही नींद आई है !!

~~

सूकून की नींद तो; नसीब की ही बात,
मन कीया सो गये; क्या दिन क्या रात ?! 

~~

बिजली के तार को न छेड़ा करो यारा,
छुप के बैठा है परिंदा ज़माने का मारा..

~~

दो बूँदें आसमान से क्या गीरी,
काग़ज़ के जहाज़ बनाते थे हम,
पत्तों का छाता; तनमन भीग जाता,
बचपन में कितने मासुम थे हम…
_

आरती परीख
२८.१.२०१५

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s