शायराना

रो रो कर जिना भी क्या खाख़ ज़िना है ?! हम तो,

हँसते हुए मौत को भी मात देने वालो मै से एक है !!

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जब किसी से मीलो तो, थोड़ी दूर की यारी ही रखना,

अक्सर जान लेवा होते है, सीने से लगाये यह रिश्ते !!

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रिश्ता यह कैसा निभाकर वोह चल दिए,

हल्की सी याद क्या आई, हम तो भीग गए !!

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महोब्बत मे रुसवाई क्या मीली, अपना आइना ही हमने तोड़ दिया,

हर टुकड़े मैं अपनेआप को जिंदा देखा, तो फिर जिंदगी से जोड़ दिया !! 
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_आरती परीख

११.५.२०१४

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